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नाच रे चोरा - विडंबन संग्रह 1 |
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3,918 |
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कोण म्हणतं आमच्या घरात |
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10,509 |
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मल्हार |
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1,212 |
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गंऽऽऽ भाजणी |
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2,115 |
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डोंबिवलीच्या चाळीमधली राजा आणिक राणी |
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2,431 |
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कणा (अतिरेक्याचा) |
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5,908 |
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चांदण्यात घोरताना |
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2,691 |
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सूतपुत्राचे दान |
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1,346 |
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मालकीहक्क |
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2,288 |
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पंधरा ऑगस्ट हा एक उत्सवच असतो |
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4,912 |
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एखादी तरी सर... |
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2,581 |
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पहिला पाऊस पडतो तेंव्हा |
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8,522 |
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हळुवार |
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1,550 |
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बायको जेंव्हा बोलत असते - हास्यकविता संग्रह 1 |
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37,119 |
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दगडांनी सतत दगडच रहायला हवं |
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1,930 |
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झब्बू... |
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4,903 |
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स्वप्नास पांघराया... |
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1,246 |
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शतदा प्रेम करावे |
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2,108 |
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तू नसताना |
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2,600 |
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सखये तू राहतेस दूर किती |
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1,571 |